Uttarakhand Mobile Network News: उत्तराखंड में चीन और नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास सहित लगभग 700 गांवों को अभी तक मोबाइल फोन नेटवर्क अब तक नहीं पहुंचा है

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देहरादून: सूचना क्रांति ने देश को दुनिया मुट्‌ठी में करने का मौका दे दिया। सूचना के इस युग में मोबाइल एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। लेकिन, उत्तराखंड के 700 गांव ऐसे हैं, जहां आज तक मोबाइल नेटवर्क सेवा नहीं पहुंच पाई है। राज्य में चीन और नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास सहित लगभग 700 गांवों को अभी तक मोबाइल फोन नेटवर्क नहीं मिला है। देश के दूरसंचार प्रहरी ने एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश के 3500 गांवों में से आधे से अधिक 2जी सेवाओं पर निर्भर हैं। मार्च में जारी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगभग 83.8 लाख लोग इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं। कुल 38.9 लाख उपयोगकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 39 फीसदी इंटरनेट उपयोगकर्ता महिलाएं हैं, जो राष्ट्रीय औसत 24.6 फीसदी से अधिक है।

उत्तराखंड के 3500 गांवों में से करीब 1,600 गांवों में सरकारी दूरसंचार प्रदाता कंपनी बीएसएनएल 2जी सेवाएं मुहैया कराती है। पहाड़ियों और दूरदराज के क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए, केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अगस्त में उत्तराखंड के लिए 1202 नए बीएसएनएल टावरों को मंजूरी दी। बीएसएनएल के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें उन क्षेत्रों में मोबाइल फोन और इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने के लिए नए टावर लगाने का काम सौंपा गया है, जहां कोई भी निजी कंपनी काम नहीं कर रही है। इससे उन क्षेत्रों के लोगों में आस जगी है, जहां अभी तक मोबाइल फोन की पहुंच ही नहीं हो पाई है।

मार्च 2023 तक पूरा होगा काम
बीएसएनएल के महाप्रबंधक विजय पाल ने बताया कि गांवों की पहचान करने के बाद, हम टावर लगाने के लिए इन क्षेत्रों में पट्टे या किराए पर निजी जमीन की तलाश कर रहे हैं। इसके अलावा, हम राज्य सरकार को वन क्षेत्रों में स्थापित करने के लिए जगह उपलब्ध कराने के लिए लिखने जा रहे हैं। पर्वतीय राज्य के अधिकतम क्षेत्रों में मोबाइल फोन सेवाओं के लिए टावरों से कवर किया जा सकता है। अधिकारियों ने कहा कि दूरदराज के इलाकों में 1200 टावर लगाने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। जल्द ही वहां ट्रांसमिशन स्टेशनों का आधार स्थापित किया जाएगा। जीएम विजय पाल ने कहा कि 1200 नए टावर लगाने का काम मार्च 2023 से पहले पूरा कर लिया जाएगा।

लोगों को हो रही है परेशानी
मोबाइल फोन की अनुपलब्धता के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को अभी भी अपने इंटरनेट से संबंधित काम को पूरा करने के लिए शहर आना पड़ता है। जुलाई में राज्य मंत्रिमंडल ने राज्य में टावर लगाने के लिए मानदंडों को आसान बनाने और मोबाइल फोन कंपनियों से मामूली शुल्क लेने का फैसला किया। किए गए परिवर्तनों के अनुसार, विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में 50,000 रुपये, नगर पंचायत के तहत 25,000 रुपये, अन्य मैदानी क्षेत्रों में 10,000 रुपये और पहाड़ी क्षेत्रों में 5,000 रुपये लिए जाएंगे।

मोबाइल फोन नेटवर्क विहीन गांवों में अल्मोड़ा जिले के 28, बागेश्वर जिले के 97, चमोली जिले के 124, चंपावत जिले के 104 गांव शामिल हैं। इनके अलावा देहरादून जिले के 56, पौड़ी जिले के 196, हरिद्वार जिले के 6, नैनीताल जिले के 60, नैनीताल जिले के 245 गांवों में अब तक मोबाइल नेटवर्क की पहुंच नहीं है। पिथौरागढ़ जिले में 20, रुद्रप्रयाग जिले में 20, टिहरी जिले में 114, यूएस नगर जिले में 3 और उत्तरकाशी जिले में 148 गांव भी इस सूची में हैं।



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