Pt. Ishwar Chandra Vidyasagar’s work land became a victim of neglect, library, homeopathic center and school became ruins | पं. ईश्वर चंद्र विद्यासागर की कर्मभूमि उपेक्षा का शिकार, पुस्तकालय, होम्योपैथिक सेंटर और स्कूल बन गया खंडहर

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जामताड़ा/करमाटांड़3 घंटे पहलेलेखक: शशि कुमार/राजन मंडल

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पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की पलंग जिसपर वे सोते थे।

  • पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की पुण्यतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि, उनके धरोहरों को संजोए रखने के लिए लोग लगातार करते रहे हैं मांग
  • विद्यासागर के नाम करमाटांड़ ब्लॉक व थाना का नामकरण होना था, लेकिन हो नहीं सका

29 जुलाई दिन गुरुवार को पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की पुण्यतिथि मनाई गई। वैश्विक महामारी के कारण सादगी के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर के कर्म भूमि रही करमाटांड़ में अनेक कार्य किए। पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की जन्म 26 सितंबर 1820 ई. को हुई थी।

पंडित विद्यासागर लगभग 20 वर्षों तक करमाटांड़ में रहे। उन्होंने इस दौरान समाज सुधारक के रूप में काम किया। महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़े। विधवा विवाह को लेकर आवाज उठाए जिसे कानूनी जामा पहनाया गया। साथ ही महिला शिक्षा पर काफी जोर दिए।

उन्होंने 20 साल के दरमियान करमाटांड़ में बालिका विद्यालय, होम्योपैथिक चिकित्सा जैसे निशुल्क सेवाएं प्रारंभ किए। इससे आसपास के हजारों लोगों को लाभ मिला। एक समय क्षेत्र में कोलेरा जैसे महामारी ने क्षेत्र में संकट का रूप ले लिए था। इसे नियंत्रण के लिए लगातार पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने लोगों के बीच जाकर चिकित्सा सेवा करते रहे।

इस महामारी के कारण लोग क्षेत्र छोड़कर भाग रहे थे। फिर भी उस समय अपनी जान की परवाह नहीं किए बगैर गांव-गांव घूम घूम कर चिकित्सा सेवा प्रदान किए और लोगों की जान को बचाए। होम्योपैथिक के माध्यम से विभिन्न तरह के इलाज करते थे। करमाटांड़ में विद्यासागर के नाम पर ही स्टेशन का नामकरण किया गया।

आदिवासी महिलाओं को आगे लाए और एक अलग पहचान दिलाए। पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर निवासन नंदनकानन का क्षेत्रफल लगभग साढे तीन एकड़ में फैला हुआ हैं। इस कैंपस के अंदर विद्यालय की कक्षाएं, होम्योपैथिक चिकित्सालय, पंडित ईश्वर चंद्र का आसन कक्ष, बागवानी, विद्यासागर की प्रतिमा एवं अन्य तरह की चीजें पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर के यादगार में रखे हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास 24 सितंबर 2019 को पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर के कर्मभूमि पहुंचकर माल्यार्पण किए थे।

महिलाओं के लिए सिलाई सेंटर की हुई स्थापना : समिति के सदस्यों एवं क्षेत्र के लोगों द्वारा बालिकाओं एवं महिलाओं के लिए सिलाई सेंटर की स्थापना की गई हैं। इस सिलाई सेंटर में प्रतिदिन क्षेत्र की असहाय एवं गरीब परिवार के महिलाएं, बच्चे आकर नि:शुल्क सिलाई सीख रहे हैं। समिति के सहायक सचिव चंदन मुखर्जी ने बताया कि विद्यासागर की कर्मभूमि सरकार की उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।

समिति के सदस्यों ने की सौंदर्यीकरण की मांग

ईश्वर चंद्र विद्यासागर के नाम पर थाना एवं ब्लॉक का नामकरण, विद्यासागर स्टेशन का सौंदर्यीकरण, विद्यासागर रेलवे स्टेशन पार्क का सौंदर्यकरण, पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर के नाम पर म्यूजियम स्थापित, पूर्व की तरह बालिका विद्यालय संचालित, होम्योपैथिक चिकित्सालय सुविधा प्रारंभ की जाए। विद्यासागर रक्षा समिति के सचिव चंदन मुखर्जी ने बताया कि समिति के लोगों के साथ बैठक कर पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की कर्मभूमि के उत्थान व विकास पर चर्चा की जाती है।

खर्च भी किए जाते हैं, परंतु जिसस्तर पर खर्च होना चाहिए उतना नहीं हो पाता है। क्योंकि, समिति के लोगों के द्वारा जो राशि एकत्रित होती है उस राशि से यहां के रहनेवाले लोगों व परिसर के साफ-सफाई पर खर्च हो जाती है। स्थानीय विधायक रणधीर सिंह ने इस वर्ष परिसर में लाइट लगवाई। कई सांसद व मंत्री आए पर कुछ हुआ नहीं।

नंदनकानन में चलने वाला बालिका विद्यालय बंद : पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर की कर्मभूमि नंदनकानन में बालिकाओं के लिए विद्यालय का संचालन किया जाता था, परंतु वह विद्यालय किताब के पन्नों में सिमट कर रह गया है। सरकार से उसके विकास के लिए कोई मदद नहीं मिली। समिति के लोग भी सक्षम नहीं हुए चलाने में।

कई दिनों तक समिति के लोगों ने मध्याह्न भोजन के साथ विद्यालय का संचालन किया था, परंतु सरकारी सुविधा नहीं मिलने के कारण आगे स्कूल नहीं चल सका। पंडित ईश्वर चंद्र विद्यासागर का देहावसान 29 जुलाई 1891 में हुआ था। नंदनकानन परिसर में विद्यालय के साथ-साथ होम्योपैथिक चिकित्सा भी पूरी तरह से बंद हो चुकी है।

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