Kedarnath Dham Kapat Closed: केदारनाथ धाम के कपाट छह माह के लिए बंद कर दिए गए बाबा केदार के विग्रह की डोली उखी मठ के ओंकारेश्वर मंदिर की ओर रवाना हो गई यमुनोत्री धाम के कपाट भी आज बंद होंगे

0
0


देहरादून : भगवान केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए गुरुवार सुबह बंद कर दिए गए। सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर पूरे विधि विधान के साथ बाबा केदारनाथ के पट को बंद कर दिया गया। इससे पहले बुधवार को बाबा केदार की भोग मूर्तियों को चल उत्सव विग्रह डोली में विराजमान किया गया। इसके बाद विधि विधान से बाबा की डोली को मंदिर के सभामंडप में रखा गया। कपाट बंद होने के बाद छह महीने बाबा केदार की पूजा ओंकारेश्वर मंदिर में होगी। यमुनोत्री धाम के कपाट भी गुरुवार को बंद होंगे। बुधवार दोपहर गंगोत्री धाम के कपाट विधि-विधान के साथ सेना के बैंड और पारंपरिक ढोल-दमाऊं की धुन के बीच बंद किए गए। मां गंगा की भोग मूर्ति सेना के बैंड और पारंपरिक ढोल-दमाऊ की अगुआई में मुखबा के लिए रवाना हुई। भाई दूज के मौके पर केदारनाथ धाम के कपाट बंद किए जा रहे हैं। इस बार भारी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कपाट को बंद किया जा रहा है।

भाई दूज के मौके पर केदारनाथ धाम के कपाट को बंद कर दिया गया। इससे पहले विग्रह पूजा को संपन्न कराया गया। बाबा केदार के कपाट बंदी के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। वहीं, यमुनोत्री धाम में भी कपाट बंदी की प्रक्रिया को पूरा कराया जा रहा है। भाई दूज के मौके पर ही यमुनोत्री के कपाट को बंद किया जाएगा। यमुनोत्री धाम पर भी बड़ी संख्या में कपाट बंदी की प्रक्रिया का दर्शन करने श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंची । केदारनाथ धाम में संधि विग्रह के बाद निकलने वाली डोली यात्रा के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी चल रहे हैं। यह यात्रा उखी मठ स्थित ओकारेश्वर मंदिर तक जाएगी। वहां पर बाबा केदार के संधि विग्रह की पूजा अगले छह माह तक होगी। बैंड-बाज के साथ बाबा की डोली अपने शीतकालीन प्रवास स्थान की ओर जा रही है।

इससे पहले उत्तराखंड के उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के चारधामों के रूप में प्रसिद्ध मंदिरों में से एक गंगोत्री धाम के कपाट बुधवार को अन्नकूट के मौके पर श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए। सर्दियों में छह माह मंदिर के बंद रहने के दौरान श्रद्धालु मां गंगा की पूजा अर्चना, उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव में कर सकेंगे। गंगोत्री मंदिर समिति के सूत्रों ने बताया कि वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां गंगा की विधि विधान से पूजा अर्चना करने के बाद मंदिर के कपाट बुधवार दोपहर 12:01 बजे शीतकाल तक के लिए बंद कर दिए गए।

गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान, धर्माधिकारियों तथा सैकडों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रिया सुबह नौ बजे उदय बेला में शुरू हुई। सर्वप्रथम मां गंगा का मुकुट उतारा गया जिसके बाद अमृत बेला में स्वाती नक्षत्र प्रीतियोग में शुभ लग्न पर ठीक 12:01 पर गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बंद किए गए। इस दौरान तीर्थ पुरोहित लगातार गंगा लहरी का पाठ करते रहे । कपाट बंद होने के बाद डोली में सवार होकर गंगा की भोगमूर्ति जैसे ही मंदिर परिसर से बाहर निकली तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।

बैंड की धुन और परंपरागत ढोल दमाऊ की थाप के साथ तीर्थ पुरोहित गंगा की डोली को लेकर उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव के लिए पैदल रवाना हुए। रात्रि विश्राम के लिए गंगा की डोली मुखबा से चार किमी पहले चंदोमति देवी के मंदिर में पहुंचेगी जहां से बृहस्पतिवार को उसे मुखबा के गंगा मंदिर ले जाया जाएगा। श्रद्धालु आगामी छह माह तक मुखबा में ही मां गंगा के दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे ।



Source link