employment opportunities, jobs: देश में दस हजार फिशरीज ग्रेजुएट की होगी जरूरत, पद्मश्री Dr. Ayypan ने कहा- मछली पालन में धान उत्पादन से कम पानी की जरूरत – ten thousand fisheries graduates will be needed in the country

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रांची: पद्मश्री और जलीय कृषि डॉ सुब्बना अय्यपन का कहना है कि एक किलो धान उत्पादन में करीब 1600 लीटर पानी की जरुरत होती है, जबकि एक किलो मछली उत्पादन में करीब 300 लीटर मात्र पानी की आवश्यकता होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी दस वर्षाें में देश को 10 हजार फिशरिज ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की जरूरत होगी। गुमला समेत देशभर में कार्यरत 30 मत्स्यिकी विज्ञान महाविद्यालय को इसके लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। पद्मश्री डॉ अय्यपन शुक्रवार को गुमला में राज्य के एकमात्र मत्स्यिकी विज्ञान महाविद्यालय के प्रशासनिक भवन के उदघाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

भारत दूसरा सबसे ज्यादा मत्स्य उत्पादक
डॉ. अय्यपन ने कहा कि मत्स्य उत्पादन क्षेत्र में चीन के बाद भारत विश्व का दूसरा सबसे ज्यादा मत्स्य उत्पादक देश है। देश में प्रतिवर्ष करीब 150 लाख टन मछली का उत्पादन होता है। इनमें झारखंड में करीब 3 लाख टन मछली उत्पादन होता है। देश में करीब 3100 मछली की प्रजातियां है। मछली में करीब 16 प्रतिशत प्रोटीन होती है और इसकी काफी मांग है। अगले 10 वर्षाे में देश को करीब 220 लाख टन मछली की आवश्यकता होगी। देश का मछली उत्पादन विकास की दर करीब 8 प्रतिशत प्रति वर्ष है। ऐसे में झारखंड सहित पूरे देश में इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं है।
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नीति आयोग भी नीति क्रांति पर जोर दे रहा
पद्मश्री अय्यन ने कहा कि अब देश की नीति आयोग भी नीली क्रांति पर जोर दे रही है। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम मत्स्य संपदा योजना द्वारा मछली उत्पादन को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। मछली उत्पादन के क्षेत्र में झारखण्ड तेजी से उभरता राज्य है। देश में इसपर चर्चा हो रही है।

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गुमला में विदेशी छात्र भी पढ़ सकेंगे
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह ने कहा कि गुमला स्थित मत्स्यिकी विज्ञान महाविद्यालय को आईसीएआर नई दिल्ली से मान्यता मिल चुकी है। अब इस कॉलेज में अन्य राज्यों के छात्र भी राष्ट्रीय कोटे से पढाई करेंगे। विदेशी छात्र भी पढ़ सकेंगे।

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