Afghan crisis; Shock to America’s image, the audacity of countries like China and Russia will increase, jihadists will be more active | अमेरिका की छवि को आघात, चीन और रूस जैसे देशों का दुस्साहस बढ़ेगा, जेहादी और सक्रिय होंगे

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2 मिनट पहले

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तालिबान के आसान कब्जे की जवाबदेही से बाइडेन मुक्त नहीं हो सकते।

अफगानिस्तान में तालिबान की आसान जीत से सबसे बड़ा झटका अमेरिका को लगा है। उसकी अपने दुश्मनों को रोकने और मित्रों को आश्वस्त करने की ताकत कम हो गई है। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की खामियां सामने आई हैं। उसकी योजना में लचीलापन नहीं था। उसके नेता अस्थिर साबित हुए हैं। उन्होंने सहयोगियों की फिक्र नहीं की। इससे दुनियाभर में जेहादियों के हौसले बुलंद होंगे। चीन या रूस जैसी विरोधी सरकारों में दुस्साहस करने का हौसला बढ़ेगा। मित्र देशों की चिंता बढ़ेगी।

हालांकि, राष्ट्रपति जो बाइडेन ने सेना की वापसी का यह कहते हुए बचाव किया है कि अफगानिस्तान के कारण चीन से अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता जैसी अधिक महत्वपूर्ण समस्याओं से हमारा ध्यान हट रहा था। अफगानिस्तान को अराजक स्थिति में छोड़कर बाइडेन ने अन्य समस्याओं का समाधान मुश्किल कर दिया है। बहरहाल, शर्मनाक वापसी से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सामान्य अफगानियों के प्रति जिम्मेदारी कम नहीं होती बल्कि बढ़ गई है।

उन्हें तालिबान से महिलाओं और अन्य लोगों के प्रति नरम रुख अपनाने के लिए दबाव डालना पड़ेगा। तालिबान ने अब तक अमेरिका को लोगों को बाहर निकालने के लिए हवाई उड़ानों की अनुमति दी है। फिर भी, देश में अमेरिकी और ब्रिटिश सैनिकों की उपस्थिति और अमेरिका द्वारा विदेशों में जमा धन तक पहुंच रोकने से तालिबान का धीरज जवाब दे सकता है। तालिबान ने इस बार उन्होंने अपना सभ्य चेहरा दिखाने की कोशिश की है।

काबुल में अमेरिकन यूनिवर्सिटी में लेक्चरार ओबेदुल्ला बहीर का कहना है, हम तालिबानियों के अनुशासन से हैरत में हैं। दूसरी ओर तालिबानी कब्जे के कुछ इलाकों से आ रही खबरें चिंताजनक हैं। हेरात में कॉलेज छात्राओं को घर लौटने को कह दिया गया है। कामकाजी महिलाओं को अपनी नौकरियां पुरुष रिश्तेदारों के लिए छोड़ने के आदेश दिए हैं। मीडिया को तालिबान की मर्जी से चलाया जाएगा। स्पिन बोल्डाक शहर पर कब्जे के बाद तालिबानियों ने दर्जनों सरकार समर्थकों को मार डाला।

कंधार में लोकप्रिय कॉमेडियन नजर मोहम्मद की हत्या कर दी गई। पाकिस्तान समर्थक तालिबान की विजय और नए सिरे से जिहादियों की सक्रियता की आशंका से कई भारतीय अधिकारी चिंतित हैं। अमेरिका के अविश्वसनीय रवैये से लोग स्तब्ध हैं। पूर्व विदेश सचिव निरूपमा राव कहती हैं, अमेरिका ने अफगानिस्तान से हटने के नतीजों पर बिलकुल ध्यान नहीं दिया है। इससे क्षेत्र में अमेरिकी ताकत की विश्वसनीयता घटी है।

अफगानिस्तान के 15 प्रांतों में अलकायदा सक्रिय

2001 में कमजोर हुए इस्लामी आतंकवाद से पश्चिमी देश चिंतित हैं। जेहादी गुटों पर नजर रखने वाली संयुक्त राष्ट्र की एक टीम ने पिछले माह बताया कि अफगानिस्तान के 34 में से 15 प्रांतों में अलकायदा सक्रिय है। कई स्थानों में आईएस की शाखाएं हैं। इनके सदस्यों की संख्या दस हजार तक है।

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