रतन टाटा की ये 5 खूबियां अपना लीं तो बन जाएंगे एक अच्छे लीडर

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नई दिल्ली : देश में शायद ही कोई हो, जिसने रतन टाटा (Ratan Tata) का नाम नहीं सुना हो। रतन टाटा सिर्फ एक अच्छे उद्योगपति ही नहीं हैं, वे एक अच्छे इंसान भी हैं। रतन टाटा लोगों की परवाह करते हैं। वे लाखों लोगों के लिए एक आदर्श हैं। उनके लिए काम करने वाले लोगों का टाटा काफी खयाल रखते हैं। आज हम आपको रतन टाटा से जुड़ी ऐसी 5 बातें बताएंगे, जो आपकी जिंदगी बदल सकती हैं। इन बातों को गांठ बांध आप एक अच्छे लीडर बन सकते हैं।

कर्मचारियों के सहायक बनें
यदि आप मानते हैं कि आपके कर्मचारियों को कठिन समय में अतिरिक्त मेहनत करनी चाहिए, तो यह बात बिल्कुल स्वाभाविक रूप से आनी चाहिए। वे कहते हैं कि कठिन समय से लड़ने के लिए संगठनों को अपने कर्मचारियों के साथ खड़ा होना चाहिए। बोझ को आपस में बांटने के उपाय तलाशे जाने चाहिए, जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों को आराम देना चाहिए। जिस भी तरीके से आप कर्मचारियों के सहायक बन सकें, उन सभी संभव तरीकों पर काम करना महत्वपूर्ण है। अगर आप यह दिखाएंगे कि आपके कर्मचारी आपके लिए मायने रखते हैं, तो यह उन्हें अच्छे परिणाम देने के लिए प्रेरित करेगा। टाटा कहते हैं, ‘कर्मचारी और कंपनी को एकजुट रहना चाहिए। कोई भी समाधान खोजने और किसी भी संकट को दूर करने के लिए एकजुट होने की आवश्यकता होती है।’

कर्मचारियों के साथ खड़े रहें
रतन टाटा अपने कर्मचारियों के साथ हमेशा खड़े रहने के लिए जाने जाते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि उस कर्मचारी की कंपनी में क्या रैंक है। टाटा भारत में कर्मचारियों की पसंदीदा कंपनियों में से एक है। टाटा ग्रुप (Tata Group) शीर्ष एंप्लाई-फ्रेंडली कंपनियों (Employee Friendly Companies) में से एक है। रतन टाटा का मानना है कि आपको उस कर्मचारी के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, जो आपके लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। उन्होंने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था, “एक बिजनेस लीडर के रूप में आपको अपने शेयरधारकों का खयाल रखना चाहिए और उसके बाद उन लोगों का जो आपके लिए काम कर रहे हैं। आपको हमेशा उनके साथ खड़े रहना चाहिए।’

छंटनी करने से बचें

वैश्विक महामारी और लॉकडाउन ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को काफी प्रभावित किया। लाखों लोग बेरोजगार हो गए। पीएम ने कंपनियों से लोगों की छंटनी ना करने का अनुरोध किया, लेकिन ज्यादातर कंपनियों को घाटे में रहने के कारण ऐसा करना पड़ा। हालांकि, रतन टाटा का मानना था कि आपके लिए काम करने वालों के प्रति वफादारी दिखाना बहुत जरूरी है। उन्होंने बिजनस लीडर्स से कहा था, ‘क्या लोगों की छंटनी करने से समस्या का समाधान हो जाएगा? यह नहीं होगा। कंपनियों को उन लोगों को सही तरीके से ट्रीट करने की जरूरत है, जो उनके साथ काम करते हैं और उन्हें अपनी सेवाएं देते हैं।’

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सहानुभूतिपूर्ण संबंध
अपने कर्मचारियों और सहकर्मियों के साथ सहानुभूतिपूर्ण संबंध रखना महत्वपूर्ण है। टाटा का मानना है कि यदि कोई कर्मचारी खुश है, तो परिणाम भी अच्छे होंगे, उत्पादकता का स्तर बढ़ेगा और लाभ भी होगा। सख्त बॉस और अस्वस्थ काम के माहौल के कारण लोग अपनी नौकरी छोड़ देते हैं। तो उन्हें नौकरी छोड़ने पर क्यों मजबूर किया जाए?

खुद को रखें अपडेट
चाहे कोई कंपनी हो या कोई छोटा कारोबार, युवा पीढ़ी के साथ तालमेल बिठाना और प्रांसगिक बने रहना महत्वपूर्ण है। युवा प्रतिभा का उपयोग लेकर कोई भी कंपनी आगे बढ़ सकती है। रतन टाटा कहते हैं, ‘मैं युवा पीढ़ी के उत्साह की कद्र करता हूं। उनकी ऊर्जा वास्तव में सभी को प्रेरित करती है और वे मुझे अच्छा महसूस कराते हैं। युवाओं के साथ रहकर कभी कोई बूढ़ा नहीं हो सकता।’

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