नीति आयोग की बैठक में राज्य ने रखी थी कई मांग कहा, परियोनजाओं पर नहीं मिल रहा केंद्र का सहयोग | In the meeting of NITI Aayog, the state had placed many demands, said the Center is not getting support on the projects

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रांचीएक घंटा पहले

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राज्य ने केंद्र से मांगा बकाया

झारखंड सरकार की कई परियोजना केंद्र सरकार के पास लंबित हैं। झारखंड सरकार ने जल्द से जल्द इन परियोजनाओं पर सहमति की मांग की है ताकि झारखंड के विकास की रफ्तार तेज हो सके। नीति आयोग के उपाध्यक्ष के साथ हुई बैठक में इस मुद्दे को झारखंड सरकार ने गंभीरता के साथ रखा है। केंद्र सरकार से बकाया चुकाने की भी मांग की है। राज्य सरकार ने जीएसटी कंपनसेशन के रूप में 1880 करोड़ रुपये बकाया की भी जानकारी दी है। कोयला कंपनियों द्वारा राज्य में 53 हजार एकड़ जमीन का इस्तेमाल किया जाता है। इसके एवज में बतौर टैक्स आठ हजार करोड़ रुपये की मांग की गयी है। सरकार ने केंद्र को कई ऐसे बकायों की जानकारी दी है जिसके भुगतान के लिए झारखंड सरकार इंतजार कर रही है।

किन योजनाओं के लिए राज्य ने केंद्र से मांगी है मदद

झारखंड सरकार ने एक के बाद एक योनजाओं का जिक्र किया है जिसमें उन्हें केंद्र के सहयोग की जरूरत है। जल शक्ति मंत्रालय ने कई परियोजनाओं का जिक्र किया रहै जिसमें स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के साथ- पाइप लाइन सिंचाई परियोजना ,नमामी गंगा परियोजना, का जिक्र किया है। स्वर्णरेखा बहुउ में द्देशीय परियोजना के लिए अतिरिक्त खर्च के रूप में 5000 करोड़ रुपये की मांग की गयी है।

जल संसाधन विभाग द्वारा पलामू पाइपलाइन सिंचाई परियोजना के लिए एआइबीपी के तहत 631 करोड़ रुपये की मांग राज्य सरकार ने की है। नॉर्थ कोयल नदी में 31।71 एमएलडी क्षमता का इनटेक वेल बनवाने के लिए एनओसी की मांग की है। नमामी गंगा परियोजना के तहत दामोदर नदी को प्रदूषण मुक्त किया जाना है। इस परियोजना के तहत रामगढ़ और धनबाद जिले का प्रस्ताव क्रमश: वर्ष 2019 और 2020 में भेजा गया है, पर अब तक स्वीकृति नहीं मिली है।

कई परियोजना केंद्र के पास लंबित
ऐसे कई परियोजना हैं जो केंद्र सरकार के पास लंबित हैं। रेल मंत्रालय के तहत विभिन्न स्थानों में बन रहे आरओबी निर्माण पर राज्य सरकार और रेलवे खर्च का आधा- आधा हिस्सा वहन करते हैं। राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण का भी खर्च वहन करना पड़ता है। राज्य सरकार द्वारा 50:50 का खर्च भूमि अधिग्रहण व यूटिलिटी शिफ्टिंग को लेकर भी बराबर खर्च करने का आग्रह किया है।

केंद्र ने राज्य की सहमति के बगैर काटा पैसा

ऊर्जा मंत्रालय ने राज्य पर डीवीसी का बकाया 5000 करोड़ रुपये हैं। राज्य सरकार की सहमति से ही राज्य के खाते से पैसे काट लिये गये। राज्य सरकार की कैबिनेट द्वारा त्रिपक्षीय समझौता से बाहर निकलने का फैसला किया गया। वहीं मासिक बिल 170 करोड़ रुपये डीवीसी को देने का फैसला किया गया। सरकार ने पैसा काटने पर आपत्ति दर्ज की है। राज्य में स्थित केंद्र सरकार के उपक्रम व कार्यालयों पर झारखंड बिजली वितरण निगम का बकाया है। जीएसटी कंपनसेशन का 1887 करोड़ रुपये बकाया है। केंद्र से कंपनसेशन की मांग की गयी है, पर भुगतान नहीं हुआ है

राज्य के 16 उग्रवाद प्रभावित को योनजा का लाभ देने की मांग
ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से झारखंड जियो टैगिंग में परेशानी हो रही है। जियो टैगिंग नहीं होने की वजह से ।5 लाख आवास सर्वे में शामिल नहीं है। वर्ष 2017 तक राज्य के 16 उग्रवाद प्रभावित (एलडब्ल्यूइ) जिलों को स्पेशनल सेंट्रल असिस्टेंस स्कीम में शामिल किया गया था। लेकिन वर्ष 2021-22 में इस योजना के तहत केवल आठ जिलों को ही शामिल किया गया है। राज्य सरकार ने इस बैठक में इस पर भी आपत्ति जतायी है। राज्य सरकार ने इसमें केंद्र से पांच वर्षों तक सभी 16 जिलों को इस योजना में शामिल करने की मांग की गयी है। साथ ही फंड रिलीज करने की मांग भी रखी गयी है।
कोल बकाया को लेकर पहले भी मुख्यमंत्री ने केंद्र को घेरा था
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले भी कई कार्यक्रमों के माध्यम से इसका जिक्र किया है। कोयला मंत्रालय कोयले की रॉयल्टी का मामला लंबे समय से लंबित है।

कोयले के मूल्य का 14 प्रतिशत रॉयल्टी देने का प्रावधान
एमएमडीआर एक्ट में कोयले के मूल्य का 14 प्रतिशत रॉयल्टी देने का प्रावधान है, लेकिन कोल इंडिया द्वारा कोयले के बिक्रय मूल्य के आधार पर रॉयल्टी का भुगतान नहीं किया गया है। वास्ड कोल पर रॉयल्टी नहीं दी जा रही है। जिस कारण बकाया बढ़कर 22000 करोड़ रुपये हो गया है। सीसीएल और बीसीसीएल से राशि के भुगतान की मांग की गयी है। राज्य में करीब 53 हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है। लैंड यूज के तहत टैक्स का 8000 करोड़ रुपये इन कंपनियों पर बकाया है। इस बैठक में सरकार ने ऐसी कई परियोजना के लिए सरकार की सहमति के साथ- साथ योजनाओें के लिए सहयोग और बकाया भुगतान की मांग की है।

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