दूसरे चरण में पहुंच गया सर्वे, पहले के 12 जिलों में एक भी मौजा का पूरा नहीं | The survey has reached the second phase, not a single one of the maujas has been completed in the earlier 12 districts.

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पटना38 मिनट पहलेलेखक: इन्द्रभूषण

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राज्य में जमीन सर्वे अब दूसरे चरण में पहुंच गया है।

राज्य में जमीन सर्वे अब दूसरे चरण में पहुंच गया है। पहले चरण में 20 जिलों की 89 अंचलों के 4989 मौजा में जमीन सर्वे शुरू किया गया है। दूसरे चरण में 18 जिलों के 129 अंचलों के 9619 मौजा में सितंबर 2021 से जमीन सर्वे हो रहा है। पहले चरण के जिन 20 जिलों में सितंबर 2020 से जमीन सर्वे के काम में तेजी लाई गई उनमें 12 जिलों में एक भी अंचल में एक भी मौजा का सर्वेक्षण अब तक पूरा नहीं हो पाया है।

मंत्री आलोक मेहता ने अधिकारियों को वर्ष 2023 के फरवरी यानी अगले 4 महीने मे पूरा कर लेने का टास्क सौंपा है। लेकिन, जमीन हालात ये है कि जमीन सर्वे का काम समाप्त करने यानी फार्म 20 का फाइनल पब्लिकेशन इन 12 जिलों मधेपुरा, अररिया, बांका, कटिहार, जमुई, शिवहर, सहरसा, खगड़िया, जहानाबाद, सीतामढ़ी, किशनगंज और अरवल के एक भी मौजा में नहीं हो पाया है।

वहीं शेखपुरा में 46 मौजा (16%) , मुंगेर जिला में 36 मौजा (12 %), बेगूसराय में 49 मौजा (11 %), लखीसराय जिला में 19 मौजा (4.61 %), नालंदा में मात्र 5 मौजा, सुपौल और पश्चिम चंपारण में मात्र 2 मौजा और पूर्णिया में सिर्फ 1 मौजा में ही अब तक जमीन सर्वे पूरा हो पाया है।

बाउंड्री निर्धारण का काम अब तक 10 फीसदी ही
जमीनी सर्वे के लिए मुख्यत: चार स्तरों पर काम होता है। किस्तवार, खानापुरी, सुनवाई और तब लगान बंदोबस्ती। इन चार स्तरों पर काम करने के पहले जमीन का बाउंड्री निर्धारण करना सबसे महत्वपूर्ण काम है। ऐसे में दूसरे चरण में जिन 18 जिलों के 129 अंचलों के 9619 मौजा में सितंबर 2021 में जमीन सर्वे शुरु हुआ उनमें 13 महीने में बाउंड्री बांधने (निर्धारण) का काम भी अब तक 10 फीसदी ही हो पाया है। इसमें भी बांका, मधेपुरा, सुपौल, किशनगंज, नालंदा, खगड़िया, जमुई, सहरसा, और बेगूसराय में एक मौजा का भी बाउंड्री निर्धारण नहीं किया जा सका है।

वहीं जहानाबाद में 81 मौजा (25 फीसदी), लखीसराय में 49 मौजा (92 फीसदी), शिवहर में 9 मौजा (8 फीसदी), कटिहार में 114 मौजा (9 फीसदी), पूर्णिया में 20 मौजा (2 फीसदी), सीतामढ़ी में 12 मौजा (2 फीसदी), पश्चिमी चंपारण में मात्र 9 मौजा, मुंगेर में 7 मौजा और अररिया में मात्र एक मौजा में ही अब तक बाउंड्री निर्धारण पूरा हो पाया है।

कम कर्मी और सर्वे काम प्राथमिकता में नहीं होना मुख्य कारण
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कर्मियों की कमी और सर्वे काम प्राथमिकता में नहीं होना धीमे काम चलने का मुख्य कारण है। इस महत्वपूर्ण काम के लिये पिछले तीन साल से 3730 कर्मी ही काम कर रहे हैं। इनकी सहायता के लिये 405 अन्य अमीनों को भी लगाया गया है। यही कारण है कि इसी हफ्ते जमीन सर्वे में तेजी लाने के लिये 10101 पदों पर बहाली के लिए विज्ञापन निकाला गया है। फरवरी तक इन सर्वे कर्मियों की बहाली पूरी कर ली जाएगी।

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