दिवाली के बाद और खराब हुई झारखंड की हवा, ध्वनि प्रदूषण ने भी बढ़ायी चिंता | Jharkhand’s air worsens after Diwali, noise pollution also raised concerns

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रांची8 मिनट पहले

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झारखंड में बढ़ता प्रदूषण

दिपावली में पटाखों ने झारखंड की हवा में और जहर घोल दिया है। दीवाली के पहले भी हवा की गुणवत्ता बहुत अच्छी नहीं थी झारखंड में जमकर हुई आतिशबाजी ने हवा को और खराब कर दिया है। इस हवा से कई गंभीर बीमारियों को खतरा बढ़ गया है ना सिर्फ हवा बल्कि ध्वनि प्रदूषण अनुमान्य सीमा से 54 फीसदी तक अधिक रहा है।

सिर्फ हवा नहीं दीपावली में ध्वनि प्रदूषण भी बढ़़ा
रांची के कचहरी चौक पर सामान्य सीमा 65 है। दिवाली पर यहां ध्वनि प्रदूषण 78 डेसीबल तक पहुंचा हुआ दर्ज किया गया है। रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर अनुमान्य सीमा 65 से 22 फीसदी अधिक 80 डेसीबल रिकॉर्ड किया गया है। शोर की यह सीमा शाम से रात 12 बजे के बीच की है। अशोक नगर में 55 डेसीबल तक शोर की सीमा तय है, दिवाली में यह 68 डेसीबत तक रिकॉर्ड किया गया है।

10 बजे के बाद भी फूटते रहे पटाखे
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) ने दिवाली पर पटाखे फोड़ने के लिए सिर्फ दो घंटे का समय दिया था और यह समयसीमा थी रात 8 बजे से रात 10 बजे तक। इसके बावजूद भी शहर में कई जगहों से 10 बजे के बाद भी पटाखों के शोर सुनायी देते रहे।

धनबाद का बढ़ता प्रदूषण एक बड़ी चिंता
सोशल मीडिया पर दिवाली के बाद इस बार कई लोगों ने धनबाद की हवा को लेकर चिंता जाहिर की। धनबाद को लेकर चिंता इसलिए भी जरूरी है क्योंकि देश में धनबाद दूसरा सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है, जहां प्रदूषण सबसे ज्यादा है। देश भर के 287 शहरों में वातावरण में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (पीएम10) के आंकड़ों के विश्लेषण के बाद यह सूची तैयार हुई है। झरिया और धनबाद देश के सबसे बड़े कोयला उत्पादक क्षेत्र हैं। यहां तक ​​कि धनबाद को देश की कोयला राजधानी कहा जाता है। वन और पर्यावरण के लिए कानूनी पहल (LIFE) के एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण धनबाद के लोगों की जीवन प्रत्याशा में 7.3 वर्ष की गिरावट आई है।

कितना खतरनाक है पटाखों का धुआं
पटाखों के धुएं से अस्थमा और एलर्जी पीड़ित मरीजों की समस्या इन दिनों अपेक्षाकृत बढ़ जाती है। डॉक्टर मानते हैं कि पटाखों के धुएं से फेफड़ों में सूजन आ सकती है। जिससे फेफड़े अपना काम ठीक से नहीं कर पाते और हालात यहां तक भी पहुंच सकते हैं कि ऑर्गेन फेलियर्स और मौत तक हो सकती है, इसलिए धुएं से बचने की कोशिश करना चाहिए। पटाखों के धुएं की वजह से अस्थमा का अटैक आ सकता है। ऐसे में जिन लोगों को सांस की समस्याएं हो, उन्हें अपने आप को प्रदूषित हवा से बचा कर रखना चाहिए।

कैसे फैलता है प्रदूषण
पटाखे के धुएं अथवा आतिशबाजी के कारण हवा में प्रदूषण बढ़ जाता है। धूल के कणों पर कॉपर, जिक, सोडियम, लैड, मैग्निशियम, कैडमियम, सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जमा हो जाते हैं। इन गैसों के हानिकारक प्रभाव होते हैं। इसमें कॉपर से सांस की समस्याएं, कैडमियम-खून की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम करता है। जिनकी की वजह से उल्टी व बुखार व लेड से तंत्रिका प्रणाली को नुकसान पहुंचता है। मैग्निशियम व सोडियम भी सेहत के लिए हानिकारक है।

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