तीन शुभ योगों में मनेगी भाई दूज, भाई को तिलक करने के दो मुहूर्त | Bhai Dooj will be celebrated in three auspicious yogas, two Muhurtas to tilak brother

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18 मिनट पहले

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आज (27 अक्टूबर) दीपोत्सव का आखिरी दिन भाई दूज है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इस दिन बहनें भाई की लंबी उम्र और सौभाग्य के लिए पूजा-पाठ करती हैं। साथ ही यमराज और चित्रगुप्त का भी पूजन किया जाता है। शाम को इन दोनों देवताओं के लिए दक्षिण दिशा में दीपक लगाने की परंपरा है।

भाई दूज पर आयुष्मान, वर्धमान और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इन योगों में किए गए धर्म-कर्म जल्दी सफल होते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक इस दिन बहनें व्रत, पूजा, कथा सुनने के बाद भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं और उनके माथे पर तिलक लगाती हैं। भाई अपनी बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता है और उपहार देता है।

मथुरा में यमुना नदी में स्नान करने की परंपरा

भाई दूज पर मथुरा में यमुना नदी में भाई-बहन डुबकी लगाने आते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से भाई-बहन को सौभाग्य और सुख-समृद्धि मिलती है। भाई-बहन आपसी स्नेह बना रहता है।

जो लोग भाई दूज पर यमुना नदी में स्नान करने नहीं जा पा रहे हैं, उन्हें घर पर ही पानी में गंगाजल और यमुना जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। स्नान करते समय पवित्र नदियों का और तीर्थों का ध्यान करना चाहिए।

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