जंगली हाथी: Jharkhand News : Wild elephants killed two hundred and fifty people in five years :पांच साल में उन लोगों ने ली है 250 लोगों की जान, रोकने के लिए क्विक रिस्पांस टीम का गठन

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रांची।
झारखंड में जंगली हाथियों और मानव के बीच संघर्ष की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। जंगल की कटाई होने और भोजन-पानी की तलाश में जंगली हाथी अब आबादी वाले गांवों में भी प्रवेश करने लगे है। पिछले पांच वर्षां में जंगली हाथियों ने 254 लोगों की जान ले लगी। मृतक के आश्रितों को सरकार की ओर से चार लाख रुपये का मुआवजा देने का भी प्रावधान किया गया है।

वन विभाग के प्रधान मुख्य संरक्षक पीके वर्मा का कहना है कि हाथी-मानव संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने क्विक रिस्पांस टीम का गठन किया है। यह टीम लोगों को जागरूक करती है और वैज्ञानिक तथा पारंपरिक तरीके से हाथियों को वापस जंगल की ओर भेजने का प्रयास करती है। इसके साथ ही हाथियों के झुंड की गतिविधियों की जानकारी मोबाइल और रेडियो के माध्यम से लोगों को दी जाती है।

वन विभाग से मिली रिपोर्ट के अनुसार साल 2020-21 में हाथी ने अबतक 32 लोगों की जान ली है। जबकि हाथी के हमले से 58 लोग घायल हुए हैं। साल 2019-20 में 60 लोगों की जान गयी, 55 लोग घायल हुए, साल 2018-19 में 25 लोगों की मौत हुई, 43 लोग घायल हुए, वर्ष 2017-18 में 78 लोगों की जान गयी और 155 लोग घायल हुए और साल 2016-17 में 59 लोगों की जान गयी और 139 लोग घायल हुए थे। इस तरह पिछले पांच वर्षां में पिछले पांच साल के आंकड़े बताते हैं कि हाथियों ने 254 लोगों की जान ली है।

राज्य सरकार की ओर से जंगली जानवरों के साथ संघर्ष में मारे गये लोगों को मुआवजा भी दिया जाता है। हाथियों के हमलों में मौत होने पर परिजनों को चार लाख रुपये, घायल होने पर 15 हजार से एक लाख रुपये तक देने का प्रावधान है। हमले में स्थायी अपंग होने पर दो लाख रुपये, फसलों के नुकसान पर 20 से 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाता है।

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